इज़रायल में हुए आम चुनाव के नतीजों में एक बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। मंगलवार को हुए मतदान के बाद अब तक 84 प्रतिशत मतपत्रों की गिनती पूरी हो चुकी है और शुरुआती रुझानों से संकेत मिल रहे हैं कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और मुख्य विपक्षी गठबंधन, दोनों ही सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सीटों के आंकड़े से पीछे रह सकते हैं।
शुरुआती एग्जिट पोल में नेतन्याहू के गठबंधन और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइज़ेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन के बीच कांटे की टक्कर दिखाई गई थी, जिसके चलते दोनों खेमे बहुमत के करीब बराबरी पर नजर आ रहे थे। अब वास्तविक मतगणना आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होता जा रहा है कि किसी भी पक्ष को आसानी से सरकार बनाने का जनादेश नहीं मिल पाएगा, जिससे आने वाले दिनों में गठबंधन बनाने को लेकर जटिल बातचीत की संभावना बढ़ गई है।
इस चुनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू फिलिस्तीनी पार्टियों का प्रदर्शन है। नतीजों में इन पार्टियों को बड़े पैमाने पर बढ़त मिलती दिख रही है, जिसे इज़रायल के राजनीतिक परिदृश्य को नए सिरे से आकार देने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, फिलिस्तीनी पार्टियों की इस बढ़त से नेसेट (इज़रायली संसद) में सत्ता संतुलन प्रभावित हो सकता है।
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चुनाव के इस दौर में सबसे चर्चित झटका धुर-दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर को लगा है। उनकी पार्टी ओत्ज़्मा येहुदित (जूइश पावर) से उम्मीद की जा रही थी कि वह वर्ष 2022 के चुनाव में मिली छह सीटों के प्रदर्शन में सुधार करेगी। लेकिन मध्य इज़रायल में आयोजित पार्टी की वॉच पार्टी में जब एग्जिट पोल के नतीजे स्क्रीन पर दिखाई दिए, तो वहां सन्नाटा छा गया, क्योंकि अधिकतर टीवी चैनलों के अनुमानों के मुताबिक पार्टी छह सीटों पर ही सिमटती दिख रही है।
नतीजों में अनिश्चितता को देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक इसे इज़रायली राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बता रहे हैं। नेतन्याहू और आइज़ेनकोट के गठबंधनों के बीच बराबरी की स्थिति से यह साफ है कि आने वाले दिनों में छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। सरकार गठन के लिए बातचीत में फिलिस्तीनी पार्टियों की संभावित भागीदारी या समर्थन भी अहम कारक बन सकता है, जो इज़रायल की पारंपरिक राजनीतिक संरचना में एक नया बदलाव दर्शाता है।
फिलहाल पूरी मतगणना पूरी होने और अंतिम आधिकारिक नतीजे सामने आने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इज़रायल में अगली सरकार किस गठबंधन के नेतृत्व में बनेगी।
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