इज़राइली सेना ने सोमवार (5 जनवरी, 2026) को कहा कि वह कब्जे वाले पश्चिमी तट (वेस्ट बैंक) में आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों को लागू करने के लिए एक नई तकनीकी व्यवस्था शुरू कर रही है। यह प्रणाली इज़राइलियों और फिलिस्तीनियों, दोनों पर लागू होगी। इज़राइली के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य पश्चिमी तट में बढ़ती यहूदी बस्तियों से जुड़े हिंसक मामलों पर नियंत्रण पाना है।
सेना की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस फैसले के तहत सुरक्षा बल उन लोगों पर तकनीकी निगरानी उपकरण लगा सकेंगे, जिन पर प्रशासनिक आदेशों के जरिए आवाजाही संबंधी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इस प्रणाली के जरिए ऐसे प्रतिबंधों के उल्लंघन पर नजर रखी जा सकेगी।
The Indian Witness रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला घरेलू सुरक्षा एजेंसी शिन बेट के प्रमुख डेविड ज़िनी के अनुरोध पर लिया गया है। यह अनुरोध पश्चिमी तट में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इज़राइली बस्तियों के निवासियों द्वारा की जा रही हिंसा में बढ़ोतरी के मद्देनज़र किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि निगरानी के लिए इलेक्ट्रॉनिक ब्रेसलेट का इस्तेमाल किया जाएगा।
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एएफपी के एक सवाल के जवाब में इज़राइली सेना ने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था इज़राइली और फिलिस्तीनी, दोनों समुदायों पर समान रूप से लागू की जाएगी। सेना ने चेतावनी दी कि निगरानी उपकरण को हटाना एक आपराधिक अपराध माना जाएगा, जिसके तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि, इस फैसले की आलोचना भी शुरू हो गई है। दक्षिणपंथी यहूदी बस्ती समुदायों के बंदियों को कानूनी सहायता देने वाले संगठन ‘होननू’ ने इस कदम की निंदा की और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही। संगठन ने इसे “अलोकतांत्रिक कदम” बताते हुए दमनकारी शासन की याद दिलाने वाला करार दिया।
प्रशासनिक प्रतिबंध आदेशों के तहत संदिग्धों को कुछ इलाकों में जाने या कुछ लोगों से संपर्क करने से रोका जाता है। इससे भी कठोर प्रावधान ‘प्रशासनिक हिरासत’ है, जिसके तहत इज़राइली सुरक्षा बल बिना आरोप लगाए छह महीने तक हिरासत में रख सकते हैं। नवंबर 2024 में रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने इज़राइलियों के खिलाफ इस प्रावधान को खत्म कर दिया था, लेकिन यह अब भी फिलिस्तीनियों पर लागू है।
अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद गाज़ा युद्ध शुरू होने से पश्चिमी तट में हिंसा और तेज हो गई। अक्टूबर में इज़राइल और हमास के बीच लागू हुए नाजुक संघर्षविराम के बावजूद हिंसा थमी नहीं है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर एएफपी की गिनती के अनुसार, इस दौरान पश्चिमी तट में 1,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें कई लड़ाके और दर्जनों आम नागरिक शामिल हैं। वहीं, आधिकारिक इज़राइली आंकड़ों के मुताबिक इसी अवधि में कम से कम 44 इज़राइली भी मारे गए हैं।
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