विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात की। बैठक में भारत ने रूस और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े नए कानून सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट (एसआरआईए) को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं। दोनों नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र और यूक्रेन की स्थिति पर भी चर्चा की।
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा कि उन्होंने एसआरआईए को लेकर भारत के हितों और चिंताओं को दोहराया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब अमेरिका ने रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए नए अधिकारों वाला कानून पारित किया है।
नए कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को निर्धारित परिस्थितियों में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। भारत और चीन रूस से कच्चे तेल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। हालांकि, कानून अपने आप भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता। किसी भी कार्रवाई का फैसला अमेरिकी प्रशासन द्वारा कानून में निर्धारित शर्तों के आधार पर किया जाएगा।
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भारत ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक हितों को प्राथमिकता देगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अपनी 1.4 अरब आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से आपूर्ति हासिल करने और बदलते बाजार हालात के आधार पर फैसले लेने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और यूक्रेन संघर्ष पर भी चर्चा हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने बैठक के बाद कहा कि अमेरिका और भारत प्रमुख क्षेत्रीय प्राथमिकताओं तथा आगामी बहुपक्षीय प्रयासों पर समन्वय कर रहे हैं।
जयशंकर और रुबियो की यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार, ऊर्जा और टैरिफ जैसे मुद्दों पर जारी बातचीत के बीच हुई है। रूस से भारतीय तेल खरीद को लेकर अमेरिकी नीतियों का आगे किस तरह क्रियान्वयन होता है, इस पर नई दिल्ली की नजर बनी हुई है।
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