विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, तनाव और संघर्षों के बीच मजबूत और प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था की जरूरत बताई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर आयोजित ‘पार्टनर्स फॉर मल्टीलैटरलिज्म समिट’ के उद्घाटन सत्र में जयशंकर ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और मौजूदा परिस्थितियां देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने की मांग करती हैं।
जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में दुनिया में शक्ति का संतुलन लगातार बदलता रहा है, लेकिन अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को अलग स्वरूप दे दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन परिस्थितियों पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के माध्यम से देशों के सहयोग की मूल भावना कमजोर हो सकती है।
उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई, विकास वित्त, उभरती तकनीक, आतंकवाद से मुकाबला, आपूर्ति शृंखला की मजबूती और भविष्य की महामारियों से निपटने की तैयारी जैसे मुद्दों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
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जयशंकर ने कहा कि अब तक हासिल उपलब्धियों को सामूहिक प्रयासों से प्राप्त किया गया है। इसलिए मौजूदा उपलब्धियों को सुरक्षित रखते हुए बेहतर व्यवस्था के लिए सुधारों की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। भारत लगातार वैश्विक संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने और अंतरराष्ट्रीय निर्णय प्रक्रिया में सुधार की मांग करता रहा है।
उन्होंने संघर्षों के बीच व्यावहारिक और लक्षित उपायों पर भी जोर दिया। उनके अनुसार, व्यापक शांति समझौते की कोशिश जारी रहते हुए भी मौजूदा संकटों के विशिष्ट पहलुओं का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने ईंधन, भोजन, उर्वरक और वित्त से जुड़े ‘चार एफ संकट’ को तत्काल ध्यान देने वाला मुद्दा बताया।
जयशंकर ने उभरती तकनीकों के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में संभावित बाधाओं को कम करने के लिए जोखिम घटाने और विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि बहुपक्षवाद को मजबूत बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और मानकों का पालन जरूरी है। साथ ही निर्णय प्रक्रिया को अधिक सहभागी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने के लिए उसके समर्थन और व्यावहारिक क्रियान्वयन दोनों को मजबूत करना होगा। भारत के 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान भी अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण वैश्विक शासन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार पर जोर दिया गया है।
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