बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख डॉ. शफीकुर रहमान ने आम चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले चुनाव में देश की जनता ‘हेजेमनी’ यानी वर्चस्व की राजनीति करने वाली ताकतों को “रेड कार्ड” दिखाएगी। उनके इस बयान को भारत के लिए एक अप्रत्यक्ष संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
रविवार (8 फरवरी 2026) को एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने कहा कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है तो वह समाज के सभी वर्गों के लिए काम करेगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि छात्र नेता नाहिद इस्लाम को महत्वपूर्ण मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी, यदि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों का गठबंधन चुनाव जीतकर सत्ता में आता है।
अपने भाषण में उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के सामने मौजूद कई चुनौतियों के लिए बीएनपी जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जनता अब बदलाव चाहती है और आने वाले चुनाव में यह साफ दिखाई देगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जमात प्रमुख का यह बयान क्षेत्रीय राजनीति और भारत-बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनावी माहौल में इस तरह के बयान राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकते हैं।
बांग्लादेश में आगामी चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और विभिन्न दल जनता को अपनी ओर आकर्षित करने में जुटे हैं। जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला गठबंधन भी अपनी रणनीति मजबूत करने और मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
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