जापान ने 2011 की फुकुशिमा परमाणु आपदा के बाद पहली बार दुनिया के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र काशीवाज़ाकी-कारीवा को फिर से शुरू करने का फैसला किया है। जापान की ऊर्जा कंपनी टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर (TEPCO) ने बताया कि यह संयंत्र बुधवार, 21 जनवरी 2026 को दोबारा चालू किया जाएगा, हालांकि फिलहाल इसके सात में से केवल एक रिएक्टर को ही शुरू किया जा रहा है।
निगाता प्रांत में स्थित इस संयंत्र को लेकर स्थानीय लोगों में अब भी सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी हुई हैं। पिछले महीने प्रांत के गवर्नर ने संयंत्र को दोबारा शुरू करने की अनुमति दे दी थी, लेकिन जनता की राय बंटी हुई है। एक सर्वे के अनुसार करीब 60 प्रतिशत लोग इसके पुनः संचालन के खिलाफ हैं, जबकि 37 प्रतिशत इसके समर्थन में हैं।
मंगलवार को कड़ाके की ठंड के बीच दर्जनों लोगों ने संयंत्र के बाहर प्रदर्शन किया। स्थानीय निवासी युमिको आबे ने कहा कि “यहां बिजली बनाकर टोक्यो भेजी जाती है, लेकिन जोखिम हमें उठाना पड़ता है, यह उचित नहीं है।”
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TEPCO ने कहा कि सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सुरक्षा मानकों को मजबूत किया गया है। संयंत्र में 15 मीटर ऊंची सुनामी दीवार, आपातकालीन बिजली प्रणालियों को ऊंचाई पर स्थापित करने जैसी व्यवस्थाएं की गई हैं। इसके बावजूद, निवासियों को भूकंप और संभावित दुर्घटनाओं का डर सता रहा है।
2011 में आए भीषण भूकंप और सुनामी के बाद जापान ने अपने सभी परमाणु संयंत्र बंद कर दिए थे। लेकिन संसाधनों की कमी, बढ़ती ऊर्जा मांग और 2050 तक कार्बन तटस्थता के लक्ष्य को देखते हुए जापान अब परमाणु ऊर्जा की ओर दोबारा लौट रहा है। प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने भी परमाणु ऊर्जा के समर्थन में बयान दिया है।
फिलहाल जापान में 14 रिएक्टर दोबारा चालू किए जा चुके हैं और सरकार की योजना 2040 तक परमाणु ऊर्जा से कुल बिजली आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हासिल करने की है। वहीं, फुकुशिमा संयंत्र को पूरी तरह बंद करने और साफ करने में अभी कई दशक लगने की संभावना है।
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