केन्या के स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को देश में इबोला के पहले आयातित मामले की पुष्टि की। संक्रमित मरीज हाल ही में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य से केन्या पहुंचा था। स्वास्थ्य सचिव एडेन डुआले ने राजधानी नैरोबी में बताया कि मरीज की सोमवार रात मौत हो गई।
डुआले के अनुसार, केन्याई नागरिक करीब एक महीने पहले कांगो में बीमार पड़ा था। इसके बाद वह सड़क मार्ग से युगांडा की राजधानी कंपाला पहुंचा और 3 अक्टूबर को विमान से नैरोबी आया। अस्पताल में उसे सहायक उपचार दिया गया, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई और सोमवार को उसकी मृत्यु हो गई।
अधिकारियों ने बताया कि मृतक के परिवार के सदस्यों, विमान में साथ यात्रा करने वाले यात्रियों और स्वास्थ्यकर्मियों समेत 28 लोगों की पहचान संपर्क के तौर पर की गई है। इन सभी को 21 दिनों के लिए अलग रखकर निगरानी में रखा जाएगा। इसके अलावा उसी उड़ान में नैरोबी पहुंचे 23 अन्य यात्रियों और चार चालक दल के सदस्यों की भी पहचान की गई है।
और पढ़ें: कांगो में विमान हादसा, दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों समेत 14 लोगों की मौत
डुआले ने कहा कि मृतक का सुरक्षित और सम्मानजनक अंतिम संस्कार इबोला से संबंधित निर्धारित स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के अनुसार किया जाएगा। अधिकारियों का उद्देश्य संक्रमण के संभावित प्रसार को रोकना और संपर्क में आए लोगों की नियमित निगरानी करना है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पूर्वी कांगो में जारी इबोला प्रकोप को लेकर चिंता जताई है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हिंसा, लोगों के विस्थापन और कमजोर निगरानी व्यवस्था के कारण बीमारी से निपटने के प्रयासों के मुकाबले संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है।
वर्तमान प्रकोप इबोला के दुर्लभ बुंडिबुग्यो स्ट्रेन से जुड़ा है। इसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या एंटीबॉडी उपचार उपलब्ध नहीं है। करीब पांच महीने पहले प्रकोप घोषित होने के बाद से 8,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और कम से कम 4,000 लोगों की मौत हुई है।
केन्या ने जून में अमेरिकी वित्त पोषण से सैन्य हवाई अड्डे पर बनाए जा रहे इबोला आइसोलेशन केंद्र का निर्माण रोक दिया था। स्थानीय लोगों ने संक्रमण के खतरे को लेकर इसका विरोध किया था, जबकि हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश ने भी परियोजना पर रोक लगा दी थी।
और पढ़ें: ज्ञानेश कुमार पर शंकरसिंह वाघेला का विवादित बयान, बोले- लोकतंत्र से खिलवाड़ करने वालों को बख्शना नहीं चाहिए