प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 फरवरी को इज़राइल स्थित विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र याद वाशेम का दौरा किया। वर्ष 1953 में कनेसेट द्वारा स्थापित इस स्मारक की यह उनकी दूसरी यात्रा है। उनके साथ इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी मौजूद रहे।
दोनों नेताओं ने ‘हॉल ऑफ नेम्स’ में जाकर होलोकॉस्ट में मारे गए लाखों यहूदियों को श्रद्धांजलि दी। नेतन्याहू ने अपनी पत्नी सारा के परिजनों की दर्दनाक कहानियां साझा कीं, जो इस त्रासदी में मारे गए थे। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘बुक ऑफ नेम्स’ हॉल में छह मिलियन पीड़ितों के अभिलेखों को नमन किया और पारंपरिक यहूदी रीति से पत्थर रखकर सम्मान प्रकट किया।
यह दौरा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि मानव गरिमा, सहिष्णुता और अन्याय के विरुद्ध साझा संकल्प का संदेश है। भारत और इज़राइल के बीच 2017 में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई मिली थी, जिसे यह यात्रा और सुदृढ़ करती है।
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यरुशलम में प्रधानमंत्री ने उन्नत प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जहां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, स्वास्थ्य और साइबर सुरक्षा में इज़राइल की उपलब्धियां प्रदर्शित की गईं। उन्होंने इज़राइली कंपनियों को भारत में निवेश का आमंत्रण दिया।
उन्हें कनेसेट द्वारा ‘स्पीकर ऑफ द कनेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में मोदी ने भारत और यहूदी समुदाय के दो हजार वर्ष पुराने संबंधों का उल्लेख किया और भारत की सहिष्णु परंपरा पर गर्व व्यक्त किया।
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