नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने जहां सम्मेलन में परोसे गए पूरी तरह शाकाहारी भोजन को लेकर सवाल उठाए, वहीं समाजवादी पार्टी ने ब्रिक्स के परिणामों को अपर्याप्त बताया है।
समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि दुनिया में चल रहे युद्धों को रोकने के लिए ब्रिक्स देशों को इससे कहीं अधिक प्रभावी कदम उठाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि अगर ब्रिक्स देश रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने या ईरान से जुड़े संघर्ष के समाधान के लिए संबंधित पक्षों को मनाने की दिशा में आगे बढ़ते, तो सम्मेलन का परिणाम अलग होता।
राम गोपाल यादव ने कहा कि इन युद्धों का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है और दुनिया का कोई भी हिस्सा इसके प्रभाव से अछूता नहीं रह सकता।
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हालांकि, 11 सदस्यीय ब्रिक्स समूह ने नई दिल्ली घोषणा-पत्र 2026 को स्वीकार किया। इसमें मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता जताई गई और अधिकतम संयम, संवाद तथा कूटनीति की अपील की गई। घोषणा में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के साथ वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।
इस घोषणा को भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। भारत ने ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मध्य पूर्व संघर्ष को लेकर मतभेदों को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी क्रम में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने नई दिल्ली में द्विपक्षीय मुलाकात की।
इससे पहले कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ब्रिक्स सम्मेलन में शाकाहारी भोजन पर सवाल उठाते हुए सरकार पर अपनी खान-पान की पसंद दुनिया पर थोपने का आरोप लगाया था। बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धियों के बजाय भोजन के मुद्दे को तूल दे रही है।
बीजेपी ने यह भी कहा कि विपक्ष को सम्मेलन के प्रस्तावों और वैश्विक चुनौतियों पर हुई चर्चाओं पर सवाल उठाने चाहिए थे। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई बातचीत का विवरण सार्वजनिक करने की भी मांग की।
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