पाकिस्तान सरकार ने बुधवार, 19 अगस्त को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए उनकी पसंद के निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। इस्लामाबाद के मुख्य आयुक्त कार्यालय ने आदेश की समीक्षा या उसे वापस लेने की मांग करते हुए पुनर्विचार याचिका दाखिल की।
सरकार ने दलील दी कि अदालत का अंतरिम आदेश ‘भेदभावपूर्ण’ है, क्योंकि यह केवल इमरान खान पर लागू होता है, जबकि सामान्य कैदियों के लिए ऐसा प्रावधान नहीं है। कानून मंत्री आजम तरार ने कहा कि खान को निजी अस्पताल भेजे जाने से अन्य दोषियों के लिए भी इसी तरह के इलाज की मांग करने का रास्ता खुल सकता है। सरकार ने आदेश को अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए इसमें कानूनी त्रुटियां होने का दावा किया।
इससे एक दिन पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि 73 वर्षीय इमरान खान को रावलपिंडी की अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में दो दिनों के भीतर भेजा जाए। उन्हें 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया गया था।
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इमरान खान 2023 से अदियाला जेल में बंद हैं और कई मामलों का सामना कर रहे हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन्हें परिवार और पार्टी सहयोगियों से मिलने से रोका तथा उनकी स्वास्थ्य समस्याओं, खासकर आंख की बीमारी, के लिए पर्याप्त इलाज नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने खान के स्वास्थ्य का आकलन करने और इलाज की निगरानी के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का भी निर्देश दिया। अस्पताल में रहने के दौरान उन्हें सप्ताह में एक बार परिवार से मिलने की अनुमति दी गई है।
जेल अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद और रावलपिंडी के विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सकों ने उनका इलाज किया और प्रभावित आंख की दृष्टि लगभग सामान्य हो गई थी। रिपोर्ट में उनका रक्तचाप 140/80, नाड़ी 54 प्रति मिनट, ईसीजी सामान्य और छाती साफ बताई गई।
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