पाकिस्तान ने गुरुवार (8 जनवरी, 2026) को कहा कि यदि भारत पश्चिमी नदियों पर सिंधु जल संधि (आईडब्ल्यूटी) का उल्लंघन करते हुए कोई विकास गतिविधि करता है, तो इस मामले को नई दिल्ली के साथ राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर उठाया जाएगा। इस्लामाबाद में साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने यह बयान दिया।
ताहिर अंद्राबी ने स्पष्ट किया कि सिंधु जल संधि एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसमें संधि को स्थगित (अबेयंस) करने का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली और उसकी सहायक नदियों के जल वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती है।
उल्लेखनीय है कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई दंडात्मक कदम उठाए थे, जिनमें सिंधु जल संधि को “अबेयंस” में रखने की घोषणा भी शामिल थी।
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अंद्राबी ने कहा कि चिनाब, झेलम और नीलम नदियों पर बनने वाली किसी भी परियोजना की जांच सिंधु जल संधि के तहत की जाती है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के सिंधु जल आयुक्त ने चिनाब नदी पर कुछ परियोजनाओं को लेकर पहले ही पत्र लिखा है। यदि झेलम और नीलम नदियों के ऊपरी हिस्सों में कोई नया विकास होता है, तो पाकिस्तान इसे न केवल आयुक्त स्तर पर बल्कि राजनीतिक, कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के उस बयान को “गैर-जिम्मेदाराना और भ्रामक” बताया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान पर दशकों से आतंकवाद को समर्थन देने के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाने का आरोप लगाया था। अंद्राबी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के प्रति सहयोग के बजाय दबाव की नीति अपनाता रहा है और उसके भीतर अल्पसंख्यकों के खिलाफ दमन बढ़ा है।
दिल्ली में एक मस्जिद के पास ढांचों को गिराए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस घटनाक्रम पर ध्यान दिया है और इसे एक सुनियोजित अभियान करार दिया।
अफगानिस्तान के मुद्दे पर अंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान और चीन, अफगानिस्तान को शामिल करते हुए त्रिपक्षीय तंत्र को आगे बढ़ाने पर सहमत हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की अफगानिस्तान के साथ एकमात्र बड़ी समस्या वहां से फैलने वाला आतंकवाद है और इस पर लिखित आश्वासन की जरूरत है।
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