कब्जे वाले वेस्ट बैंक में इज़राइली सैनिकों की गोलीबारी में एक 14 वर्षीय फिलिस्तीनी बच्चे की मौत हो गई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पूरे क्षेत्र में इज़राइली सेना और यहूदी बसाहटकर्ताओं की हिंसा में तेज़ी देखी जा रही है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फिलिस्तीनी बच्चे लगातार हिंसा के निशाने पर आ रहे हैं।
मृतक की पहचान मोहम्मद नासान (14) के रूप में हुई है। फिलिस्तीनी के अनुसार, शुक्रवार को इज़राइली सैनिकों ने रामल्ला के पास अल-मुघय्यिर गांव में धावा बोला और फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान नासान को पीठ और सीने में गोली लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इज़राइली सेना ने एक बयान में कहा कि सैनिकों ने नासान को इसलिए गोली मारी क्योंकि वह “पत्थर लेकर उनकी ओर दौड़ रहा था।” हालांकि, स्थानीय अधिकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दावे को खारिज किया है। अल-मुघय्यिर ग्राम परिषद के प्रमुख अमीन अबू अलिया ने बताया कि इससे पहले उसी दिन इज़राइली बसाहटकर्ता सेना की सुरक्षा में गांव के दक्षिणी इलाके में घुसे और गोलियां चलाईं।
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विशेषज्ञों के मुताबिक, गाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में वेस्ट बैंक में हिंसा बढ़ी है, जिसका उद्देश्य फिलिस्तीनियों को उनके घरों और इलाकों से बेदखल करना है।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल इज़राइली बलों या बसाहटकर्ताओं की हिंसा में कम से कम 240 फिलिस्तीनियों की मौत हुई, जिनमें 55 बच्चे शामिल थे। यूएन के मानवीय कार्यालय ओचा ने बताया कि 2025 में 1,800 से अधिक बसाहटकर्ता हमले दर्ज किए गए, जो 2006 के बाद सबसे अधिक औसत है।
इज़राइली मानवाधिकार संगठन बीट्सेलेम ने सेना पर “खुली गोलीबारी की नीति” अपनाने का आरोप लगाया है। अधिकार संगठनों का कहना है कि दंडहीनता के चलते फिलिस्तीनी बच्चों की जान लगातार खतरे में है।
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