प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 फरवरी सुबह 10 बजे ‘परीक्षा पे चर्चा 2026’ के नौवें संस्करण में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद करेंगे। बोर्ड और प्रतियोगी परीक्षाओं से पहले होने वाला यह वार्षिक कार्यक्रम छात्रों को तनाव से निपटने, बेहतर तैयारी करने और जीवन के प्रति संतुलित दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करता है। इस वर्ष कार्यक्रम में रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली है। कुल 6.76 करोड़ लोगों ने इसमें हिस्सा लिया, जिनमें से 4.5 करोड़ से अधिक ने औपचारिक रूप से पंजीकरण कराया, जबकि 2.26 करोड़ लोगों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया।
पिछले वर्षों में पीएम मोदी ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन का एक हिस्सा है। छात्रों को अपने अंकों को सफलता का अंतिम पैमाना नहीं मानना चाहिए। उन्होंने उत्तर लिखने का नियमित अभ्यास करने पर जोर दिया और कहा कि इससे परीक्षा हॉल का तनाव काफी कम हो जाता है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को खुद से प्रतिस्पर्धा करने, असफलता को सीखने का अवसर मानने और वास्तविक लक्ष्य तय करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर करने की कोशिश करनी चाहिए। योग को तनाव कम करने का प्रभावी तरीका बताते हुए उन्होंने नियमित अभ्यास की सलाह दी।
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सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग पर भी उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण अपनाने को कहा। स्मार्टफोन को सीखने का साधन बनाकर उपयोग करने और स्क्रीन टाइम सीमित रखने पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को पर्याप्त नींद और अच्छे स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
पीएम मोदी ने अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों के परिणामों की तुलना दूसरों से न करें और उनकी अनूठी प्रतिभा को पहचानें। उन्होंने आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने और उससे सीखने की बात कही। उनका संदेश साफ है—धैर्य, संतुलन और आत्मविश्वास से परीक्षा की तैयारी करें और जीवन में आगे बढ़ें।
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