पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान की सैन्य शक्ति अब भी काफी मजबूत है और वह क्षेत्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण ताकत बना हुआ है। यह निष्कर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के दावों के विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि ईरान की वायुसेना और नौसेना को भारी नुकसान हुआ है।
रिपोर्ट के अनुसार, हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बावजूद ईरान की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह से कमजोर नहीं हुई हैं। इसमें कहा गया है कि ईरान की वायुसेना नष्ट नहीं हुई है और उसकी नौसेना भी पूरी तरह निष्क्रिय नहीं है।
इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के नेताओं के अनुरोध पर लिया गया है ताकि ईरान को एक संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
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ट्रंप ने कहा कि ईरान का नेतृत्व “गंभीर रूप से विभाजित” है और जब तक वह एक एकीकृत प्रस्ताव नहीं देता, तब तक उसके बंदरगाहों पर नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सतर्क रहेगी।
इस फैसले पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई है। ईरानी संसद अध्यक्ष के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने कहा कि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि युद्धविराम बढ़ाने का कोई महत्व नहीं है और अमेरिका की नाकेबंदी को आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान को अब सैन्य रूप से पहल करनी चाहिए और किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
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