राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि तकनीक, विशेष रूप से फिनटेक, को केवल तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहकर सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और समावेशन का सशक्त माध्यम बनना चाहिए। वे भुवनेश्वर में आयोजित ब्लैक स्वान समिट, इंडिया को संबोधित कर रही थीं, जिसका आयोजन ओडिशा सरकार ने ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क के सहयोग से किया।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की फिनटेक यात्रा को सिर्फ नवाचार की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि लैंगिक न्याय की मिसाल के रूप में भी याद किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर नए डिजिटल प्लेटफॉर्म, उत्पाद और नीति का मूल्यांकन इस आधार पर किया जाना चाहिए कि वह महिलाओं को डिजिटल और वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय भागीदार बनाता है या नहीं।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल फिनटेक सेवाओं की उपभोक्ता के रूप में नहीं, बल्कि नेतृत्वकर्ता, पेशेवर और उद्यमी के रूप में देखा जाना चाहिए। बीते एक दशक में भारत में डिजिटल और वित्तीय बदलाव का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और डिजिटल भुगतान देशभर में किसानों, छोटे दुकानदारों और महिलाओं के लिए जीवनरेखा बन गए हैं।
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उन्होंने बताया कि देश में 57 करोड़ से अधिक जनधन खाते हैं, जिनमें से 56 प्रतिशत से अधिक महिलाओं के नाम पर हैं। इससे वित्तीय समावेशन, भरोसे और भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि फिनटेक अपने आप समावेशन की गारंटी नहीं देता। दूरदराज़, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई नागरिक अभी भी डिजिटल उपकरणों से परिचित नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि समान विकास के लिए कौशल विकास और डिजिटल साक्षरता बेहद जरूरी है। राष्ट्रपति ने उद्यमियों और नवप्रवर्तकों से ऐसी तकनीक विकसित करने का आग्रह किया जो समावेशन, रोजगार सृजन और उद्यमिता को बढ़ावा दे।
तेजी से बदलती तकनीक के साथ आने वाली चुनौतियों पर भी राष्ट्रपति ने ध्यान दिलाया। उन्होंने साइबर सुरक्षा खतरों, गलत सूचना, डीपफेक और वित्तीय धोखाधड़ी का उल्लेख करते हुए सतर्कता और जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और साइबर धोखाधड़ी निवारण से जुड़ी सरकारी पहलों का उल्लेख किया।
उभरती तकनीकों की भूमिका पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को बदल रही है। उन्होंने इंडिया एआई मिशन और आगामी इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का जिक्र करते हुए ओडिशा द्वारा शासन, स्वास्थ्य, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं में एआई के उपयोग की सराहना की।
समिट के समापन पर राष्ट्रपति ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की यात्रा समावेशन, न्याय और गरिमा के मूल्यों पर आधारित रहनी चाहिए।
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