आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब पार्टी नेतृत्व और कार्यसंस्कृति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें महसूस होने लगा था कि वे “गलत पार्टी में सही व्यक्ति” हैं, क्योंकि पार्टी के भीतर “टॉक्सिक वर्क एनवायरनमेंट” बन चुका था।
राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने राजनीति में आने से पहले चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के रूप में अपना करियर छोड़ा था, ताकि देश के लिए काम कर सकें। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने 15 साल पार्टी को समर्पित किए, लेकिन अब पार्टी पहले जैसी नहीं रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि AAP में काम करने और संसद में बोलने तक की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई थी। चड्ढा ने कहा कि पार्टी में अब कुछ नेता अपने निजी हितों के लिए काम कर रहे हैं और भ्रष्टाचार का माहौल बन गया है।
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उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक या दो लोग पार्टी छोड़ते हैं तो उन पर सवाल उठ सकता है, लेकिन सात लोगों का एक साथ जाना यह दर्शाता है कि समस्या कहीं गहरी है। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने यह फैसला किसी दबाव या डर के कारण नहीं, बल्कि निराशा और असंतोष के चलते लिया है।
चड्ढा के अनुसार उनके सामने तीन विकल्प थे—या तो राजनीति छोड़ दें, या पार्टी में रहकर बदलाव की कोशिश करें, या फिर किसी अन्य दल में जाकर सकारात्मक राजनीति करें। उन्होंने तीसरा विकल्प चुनते हुए अन्य छह नेताओं के साथ पार्टी छोड़ दी।
इधर, AAP ने राज्यसभा के सभापति से इन सात सांसदों को अयोग्य ठहराने की मांग की है और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब AAP आगामी चुनावों से पहले अपने संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है, लेकिन नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने से उसकी रणनीति पर असर पड़ सकता है।
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