अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान चोरी के मामले की जांच तेज हो गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मंदिर में सबसे अधिक कथित दान चोरी महाकुंभ मेले के दौरान हुई, जब श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपियों ने इसी भीड़ और बढ़े हुए दान का फायदा उठाकर सुनियोजित तरीके से चोरी की वारदातों को अंजाम दिया।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से कुछ पहले भी छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं में शामिल रहे थे। बाद में उन्होंने आपस में साजिश रचकर मंदिर के दान में गड़बड़ी शुरू की। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने बढ़ती दान राशि का फायदा उठाते हुए लंबे समय तक चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों में रिश्ते में साले-बहनोई लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। पुलिस का दावा है कि दोनों ने कथित तौर पर सबसे अधिक दान की चोरी की और चोरी की रकम से सबसे ज्यादा संपत्तियां भी खरीदीं। पुलिस को इन दोनों से जुड़ी पांच से छह संपत्तियों की जानकारी मिली है, जिनकी खरीद के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत की जांच की जा रही है।
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अयोध्या पुलिस इस मामले में वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाने के लिए आयकर विभाग की भी मदद ले रही है। साथ ही, जांच अधिकारियों को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह है। इसलिए बैंक से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की भी जांच की जा रही है।
यह विवाद 7 जून को सामने आया था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के दान में गबन का आरोप लगाया था। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को एफआईआर दर्ज की गई। अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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