सऊदी हवाई अड्डे पर हमले से बढ़ा संकट
सऊदी अरब के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका है। लेख के अनुसार, इस हमले में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। इसी बीच खबरें हैं कि पाकिस्तान की सेना सऊदी अरब में तेजी से तैनात की जा रही है, जबकि इस मुद्दे पर पाकिस्तानी संसद में चर्चा नहीं हुई। ईरान ने भी पाकिस्तान को चेतावनी दी है। दूसरी ओर, तेहरान अफगानिस्तान के तालिबान को चाबहार बंदरगाह तक पहुंच देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मक्का समझौते पर उठे सवाल
पाकिस्तान की राजनीति में सेना की भूमिका और संसद की सीमित शक्ति लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। कहा गया है कि अगस्त में हुए मक्का समझौते के तहत सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने सामूहिक रक्षा की प्रतिबद्धता जताई थी। समझौते के अनुसार, किसी एक सदस्य देश पर सशस्त्र हमला तीनों पर हमला माना जाएगा।
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हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस समझौते में पाकिस्तान की ओर से परमाणु सुरक्षा की गारंटी शामिल है या नहीं। पाकिस्तान ने कहा था कि समझौता किसी एक देश के खिलाफ नहीं है।
हूतियों की सैन्य ताकत बनी चुनौती
यमन के हूती विद्रोही ड्रोन और मिसाइलों के इस्तेमाल में सक्षम हो चुके हैं। सऊदी अरब और हूतियों के बीच संघर्ष वर्ष 2015 से जारी है। उस समय रियाद के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी की सरकार का समर्थन किया था। इसके बाद ईरान की सहायता बढ़ने से संघर्ष क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्विता का हिस्सा बन गया।
आशंका जताई गई है कि यदि पाकिस्तान इस संघर्ष में सीधे शामिल होता है, तो उसे भारी सैन्य और राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
संसद की मंजूरी और ईरान की चेतावनी
पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 245 के तहत सशस्त्र बल संघीय सरकार के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी युद्ध में सेना की तैनाती के लिए संसदीय अधिकार और कानूनी प्रक्रिया का सवाल अहम है। पाकिस्तान पहले से सऊदी अरब में लगभग 8,000 सैनिकों, जेएफ-17 लड़ाकू विमानों, ड्रोन और एच-क्यू-9 वायु रक्षा प्रणालियों की व्यवस्था कर चुका है।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि उनका देश दूसरे देश की जमीन से हमला करने के लिए सैनिक नहीं भेजेगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यमन पर हमलों में पाकिस्तान या तुर्की की भागीदारी से उनके जहाजों, हितों और क्षेत्रों को निशाना बनाया जा सकता है।
इसी बीच, ईरान चाबहार बंदरगाह के पास तालिबान को व्यापारिक बुनियादी ढांचा विकसित करने के लिए जमीन देने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के एक पूर्व राजनयिक ने भारत सरकार से संपर्क करने की कोशिश भी की है, ताकि उसकी पश्चिमी सीमा पर तनाव न बढ़े।
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