दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यंग मंगलवार (13 जनवरी, 2026) को जापान के प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के साथ शिखर वार्ता के लिए जापान के नारा शहर जाएंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब एक सप्ताह पहले ही राष्ट्रपति ली ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। सियोल इस पहल के जरिए अपने दोनों पड़ोसी देशों—चीन और जापान—के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
नारा में होने वाला यह शिखर सम्मेलन ऐसे वक्त आयोजित हो रहा है, जब बीजिंग और टोक्यो के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री ताकाइची इस बैठक में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच त्रिपक्षीय संबंधों की स्थिरता पर जोर दे सकती हैं।
राष्ट्रपति ली का कहना है कि चीन और जापान के बीच टकराव क्षेत्रीय शांति के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन दक्षिण कोरिया इस विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेगा। जापानी प्रसारक एनएचके को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि ताइवान के मुद्दे पर चीन और जापान के मतभेद उनके आपसी मामले हैं।
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पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री ताकाइची के ताइवान को लेकर दिए बयान के बाद चीन नाराज़ हो गया था। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान की सरकार इस दावे को खारिज करती है। बढ़ते तनाव के बीच जापान, दक्षिण कोरिया के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की कोशिश कर सकता है।
बैठक में कोरियाई प्रायद्वीप का परमाणु निरस्त्रीकरण, उत्तर कोरिया द्वारा अगवा किए गए जापानी नागरिकों का मुद्दा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय भी चर्चा में रहेंगे। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार, ठोस समझौते की सबसे अधिक संभावना व्यापारिक क्षेत्रों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और बौद्धिक संपदा—में है।
इसके अलावा, फुकुशिमा क्षेत्र से जापानी समुद्री खाद्य पदार्थों पर दक्षिण कोरिया द्वारा लगाए गए प्रतिबंध का मुद्दा भी एजेंडे में शामिल रहेगा। राष्ट्रपति ली की यह दो दिवसीय जापान यात्रा दोनों देशों के बीच ‘शटल कूटनीति’ का हिस्सा मानी जा रही है।
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