अमेरिका की बजट एयरलाइन स्पिरिट एयरलाइंस गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रही है और अब उसके बंद होने का खतरा बढ़ गया है। कंपनी को बचाने के लिए जरूरी सरकारी बेलआउट डील तय समय सीमा तक नहीं हो पाई, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है।
स्पिरिट एयरलाइंस पहले ही दो वर्षों में दूसरी बार दिवालियापन की प्रक्रिया में प्रवेश कर चुकी है। ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर जेट ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है, जिससे एयरलाइन पर आर्थिक दबाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह संकेत दिया था कि सरकार इस एयरलाइन को बचाने के लिए बेलआउट पर विचार कर रही है। शुक्रवार (1 मई 2026) को ट्रंप प्रशासन ने एयरलाइन को एक “अंतिम प्रस्ताव” दिया, जिसमें करदाताओं के पैसे से संभावित अधिग्रहण की बात शामिल थी, ताकि कंपनी को दिवालियापन से बचाया जा सके।
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हालांकि, समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका, जिससे एयरलाइन के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जल्द कोई वित्तीय सहायता या समझौता नहीं होता है, तो स्पिरिट एयरलाइंस के संचालन पर रोक लग सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती ईंधन लागत, कर्ज का बोझ और बाजार में प्रतिस्पर्धा के कारण एयरलाइन पहले से ही दबाव में थी। युद्ध और वैश्विक तेल संकट ने उसकी स्थिति और कमजोर कर दी है।
इस घटनाक्रम ने अमेरिकी एविएशन सेक्टर में भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि एक बड़ी बजट एयरलाइन का बंद होना यात्रियों और रोजगार दोनों पर असर डाल सकता है।
अब सभी की नजरें अमेरिकी सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या स्पिरिट एयरलाइंस को बचाने के लिए कोई अंतिम वित्तीय सहायता दी जाएगी या कंपनी पूरी तरह बंद हो जाएगी।
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