सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को बड़ी राहत देने वाले तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल) दी थी, जिससे उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा मिली थी।
यह मामला हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयाँ सरमा द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है।
असम में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि पवन खेड़ा ने यह दावा किया था कि रिनिकी भुइयाँ सरमा के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं। इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, खासकर उत्तर-पूर्व राज्य के विधानसभा चुनावों से पहले।
और पढ़ें: पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने हटाए गए मतदाताओं को अंतरिम वोटिंग अधिकार देने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पवन खेड़ा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें मिली गिरफ्तारी से सुरक्षा फिलहाल समाप्त हो गई है। अब इस मामले में आगे की सुनवाई शीर्ष अदालत में जारी रहेगी।
मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस और विपक्षी दलों का कहना है कि यह मामला राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष इसे गंभीर आरोपों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश को प्रभावी नहीं रहने दिया है और आगे की सुनवाई में विस्तृत विचार की संभावना जताई है।
यह मामला अब देश की शीर्ष अदालत में कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बन गया है।
और पढ़ें: पवन खेड़ा को मिली ट्रांजिट जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची असम सरकार