सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने बुधवार (28 जनवरी 2026) को मॉस्को में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया में रूस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों के भविष्य को लेकर बातचीत हुई। क्रेमलिन सीरिया में अपने सैन्य अड्डों को सुरक्षित रखने के लिए नए नेतृत्व के साथ समझौता करने की कोशिश कर रहा है।
रूस, 14 वर्षों तक चले खूनी सीरियाई गृहयुद्ध के दौरान अहमद अल-शारा के पूर्ववर्ती बशर अल-असद का प्रमुख सहयोगी रहा था। हालांकि, अल-शारा के नेतृत्व वाली विद्रोही ताकतों द्वारा असद को सत्ता से हटाए जाने से क्षेत्र में रूस के प्रभाव को बड़ा झटका लगा और सीरिया में मौजूद उसके सैन्य ठिकानों की स्थिति पर भी सवाल खड़े हो गए।
सत्ता में आने के बाद से ही राष्ट्रपति पुतिन, अहमद अल-शारा के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, असद और उनकी पत्नी को अब भी मॉस्को में शरण दिए जाने को लेकर सीरिया की आपत्ति दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
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पुतिन ने कहा, “हमारे अंतर-राज्यीय संबंधों को बहाल करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है।” उन्होंने सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता बहाल करने के प्रयासों की भी सराहना की, जो उत्तर-पूर्वी सीरिया में कुर्द बलों के खिलाफ हालिया सैन्य अभियान की ओर संकेत माना जा रहा है।
यह सत्ता संभालने के बाद अल-शारा की पुतिन से दूसरी मुलाकात थी। उन्होंने कहा कि रूस की “न केवल सीरिया की एकता और स्थिरता में, बल्कि पूरे क्षेत्र में ऐतिहासिक भूमिका” रही है।
हालांकि बैठक में रूस की सैन्य मौजूदगी का सीधे तौर पर जिक्र नहीं हुआ, लेकिन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पहले कहा था कि यह मुद्दा बातचीत में जरूर उठेगा। फिलहाल रूस के सीरिया में दो सैन्य अड्डे बचे हैं—हमैमिम एयरबेस और भूमध्यसागर तट पर स्थित टार्टस नौसैनिक अड्डा। ये पूर्व सोवियत संघ के बाहर रूस के एकमात्र आधिकारिक सैन्य अड्डे हैं।
इसी बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अहमद अल-शारा की प्रशंसा करते हुए कहा कि सीरिया में हालात “काफी अच्छे तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।”
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