बुधवार को कोझिकोड नगर निगम की नई परिषद का पहला सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रमुख नागरिक और प्रशासनिक मुद्दों पर लंबी तथा तीखी बहसें देखने को मिलीं। यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक रहा, क्योंकि पहले जहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) को परिषद में स्पष्ट बहुमत प्राप्त होता था, वहीं इस बार परिषद ‘हंग’ स्थिति में है। इस बदले हुए राजनीतिक समीकरण ने निर्णय लेने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल और लंबा बना दिया है।
नगर निगम की इस पहली बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा चार घंटे से अधिक समय तक चली। मेयर ओ. सदाशिवन की अध्यक्षता में दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई बैठक शाम 6:15 बजे तक जारी रही। परिषद की हंग स्थिति के कारण हर प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हुई और कई मामलों में तीखे राजनीतिक मतभेद भी सामने आए।
विपक्षी पार्षदों ने सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के रखरखाव से जुड़े अनुबंध में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इस ठेके में नियमों की अनदेखी की गई है और सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है। विपक्ष ने इस मामले की जांच के लिए सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (VACB) से जांच कराने की मांग की।
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विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन पारदर्शिता के साथ काम नहीं कर रहा और ठेके आवंटन में जवाबदेही की कमी है। वहीं, सत्तापक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत अपनाई गई हैं।
नई परिषद का यह पहला सत्र यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में कोझिकोड नगर निगम में राजनीतिक सहमति बनाना एक बड़ी चुनौती होगा। हंग परिषद की स्थिति में हर निर्णय के लिए व्यापक चर्चा और समझौते की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे नगर प्रशासन की कार्यशैली में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
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