संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को मंगलवार तक समझौते पर सहमति देने की कड़ी समयसीमा दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान इस डेडलाइन को पूरा नहीं करता, तो उसे अपने प्रमुख नागरिक ढांचे के “पूर्ण विनाश” का सामना करना पड़ सकता है।
इसी अहम समय पर, व्हाइट हाउस के कार्यक्रम के अनुसार, डोनाल्ड ट्रम्प का भारत में अमेरिकी राजदूत के साथ एक बंद कमरे में डिनर बैठक भी निर्धारित है। इस बैठक का उद्देश्य स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके समय को लेकर कूटनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ संयोग है या किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा।
ईरान ने ट्रम्प की चेतावनी को सख्ती से खारिज करते हुए इसे “अहंकारी बयानबाजी” बताया। तेहरान के सैन्य नेताओं ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली बलों के खिलाफ उनके अभियान बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगे।
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अमेरिका की प्रमुख मांगों में से एक है कि ईरान हॉर्मुज़ जलसंधि को फिर से खोले, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि ऐसा न करने पर नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं, जिनमें पुलों और बिजली संयंत्रों पर बड़े पैमाने पर हमले शामिल हो सकते हैं।
दोनों देशों के बीच बयानबाजी का स्तर भी काफी तेज हो गया है। ईरान की सेना ने ट्रम्प को “भ्रमित” बताया और अपने अभियानों को जारी रखने की बात दोहराई।
इस बीच, संघर्ष को रोकने के अंतरराष्ट्रीय प्रयास भी कमजोर पड़ते दिख रहे हैं। प्रस्तावित 45 दिन का युद्धविराम दोनों पक्षों को स्वीकार्य नहीं हुआ, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
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