अमेरिका एक बार फिर युद्ध में है और मानव जीवन की हानि के साथ-साथ इसका आर्थिक बोझ भी बेहद भारी साबित हो रहा है। ईरान पर हमलों के पहले 24 घंटों में ही अमेरिका ने लगभग 779 मिलियन डॉलर, यानी करीब 6,900 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह युद्ध एक महीने या उससे अधिक समय तक चल सकता है।
पेन व्हार्टन बजट मॉडल के निदेशक और अमेरिका के प्रमुख वित्तीय विश्लेषकों में से एक केंट स्मेटर्स के अनुसार, यदि युद्ध लंबा खिंचता है तो इसकी कुल लागत 210 अरब डॉलर यानी लगभग 18.87 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
अमेरिकन सिक्योरिटी के आंकड़ों के मुताबिक, यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड जैसे विमानवाहक पोत समूह को संचालित करने में प्रतिदिन लगभग 6.5 मिलियन डॉलर (करीब 58 करोड़ रुपये) खर्च होते हैं। हमलों से पहले अमेरिका ने मध्य पूर्व में दो विमानवाहक पोत समूह तैनात किए। इस सैन्य तैयारियों की अनुमानित लागत लगभग 630 मिलियन डॉलर (करीब 5,556 करोड़ रुपये) रही।
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7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर हमले के बाद से अमेरिका ने इज़राइल को 21.7 अरब डॉलर की सैन्य सहायता दी है। ब्राउन यूनिवर्सिटी की 2025 ‘कॉस्ट्स ऑफ वॉर’ रिपोर्ट के अनुसार, यमन, ईरान और अन्य क्षेत्रों में अभियानों पर 9.65 से 12.07 अरब डॉलर खर्च हुए।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि युद्ध चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है, लेकिन अमेरिका के पास इसे और लंबा जारी रखने की क्षमता है। उन्होंने ईरान के साथ बातचीत से भी इनकार कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत अली बहरेनी ने कहा कि यह युद्ध ईरानी राष्ट्र पर थोपा गया है और जब तक आक्रामकता बंद नहीं होगी, उनका बचाव जारी रहेगा।
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