अमेरिका-ईरान संघर्ष का दूसरा दौर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे तो यह ऊर्जा संकट और वैश्विक मंदी को जन्म दे सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका ने समुद्री क्षेत्र में सख्त नौसैनिक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस वजह से यह क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए बेहद खतरनाक बन गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल और गैस आपूर्ति के लिए इसी मार्ग पर निर्भर है। यदि यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ सकती है, शेयर बाजारों में भारी गिरावट आ सकती है और ईंधन संकट गहरा सकता है।
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इस बीच, हाल के हमलों में ओमान तट के पास तीन व्यापारी जहाजों को निशाना बनाया गया, जिसमें कई भारतीय चालक दल के सदस्यों की भी मौत हुई है। अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल प्रतिबंधित मार्गों पर जाने वाले जहाजों को रोकने के लिए है, लेकिन इन हमलों से नागरिकों की मौत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति जटिल बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले समझौते की संभावना जताई थी, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर गहरे मतभेद बने हुए हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपना उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार खत्म करे, जबकि ईरान प्रतिबंध हटाने और संपत्तियों को जारी करने की मांग कर रहा है।
साथ ही ईरान ने अपने सहयोगी हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच संघर्ष खत्म करने की शर्त भी रखी है, जिसे लेकर स्थिति और जटिल हो गई है।
कतर और पाकिस्तान जैसे देशों ने तनाव कम करने की अपील की है, लेकिन फिलहाल शांति समझौते की संभावना कमजोर दिख रही है।
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