अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन में संभावित शांति मिशन के लिए भारतीय और सऊदी अरब के सैनिकों की तैनाती का सुझाव दिया था, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह दावा न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान द्वारा लिखी गई नई किताब ‘रेजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ में किया गया है।
किताब के अनुसार, 30 जनवरी को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी रणनीति पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वॉल्ट्ज और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बैठक के दौरान अमेरिकी सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग ने रूस-यूक्रेन युद्ध समाप्त कराने के लिए ‘अमेरिका फर्स्ट प्लान’ प्रस्तुत किया। इसी चर्चा के दौरान वेंस ने सुझाव दिया कि नाटो सैनिकों की बजाय भारत या सऊदी अरब के सैनिकों को यूक्रेन में शांति सैनिक के रूप में भेजा जा सकता है। उनका मानना था कि नाटो बलों की तैनाती रूस को और अधिक उकसा सकती है।
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हालांकि ट्रंप ने इस विचार को तुरंत खारिज कर दिया। किताब के मुताबिक उन्होंने कहा, “भारतीय ऐसा नहीं करेंगे। वे इस तरह की किसी चीज़ के लिए भुगतान नहीं करेंगे।”
किताब में यह भी दावा किया गया है कि ट्रंप ने बैठक के दौरान कहा कि उनके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें पसंद करते हैं और उनसे मिलने की इच्छा भी रखते हैं, लेकिन भारत ऐसे अभियानों पर खर्च करने से बचता है।
गौरतलब है कि यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है। भारत लगातार कहता रहा है कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की से कई बार बातचीत कर शांति का समर्थन किया है।
हाल ही में फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ज़ेलेंस्की से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत हमेशा शांति और मानवता के पक्ष में खड़ा रहेगा।
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