तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने संकेत दिया है कि मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी। उनके इस बयान के बाद राज्य की सियासत में नई बहस छिड़ गई है।
अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने अपने गठन के बाद पहला विधानसभा चुनाव लड़ते हुए 108 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया था। इस जीत के साथ उसने तीन दशक से चली आ रही डीएमके और एआईएडीएमके की राजनीतिक पकड़ को चुनौती दी।
रिपोर्ट के अनुसार, स्टालिन ने दावा किया कि टीवीके की अल्पमत सरकार अगले तीन से छह महीनों के भीतर गिर सकती है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है, जबकि टीवीके के पास केवल 108 विधायक हैं।
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स्टालिन ने आरोप लगाया कि जनता ने वास्तव में डीएमके को सत्ता में लाने के लिए मतदान किया था, लेकिन डीएमके के पूर्व सहयोगी दलों के समर्थन के कारण विजय सरकार सत्ता में बनी हुई है। उन्होंने सरकार को "अस्थिर व्यवस्था" बताते हुए कहा कि यह कब तक टिकेगी, इसका कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी समय चुनाव की संभावना को देखते हुए अभी से चुनावी तैयारियां शुरू करने का आह्वान किया।
तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके के पास 108, डीएमके के पास 59 और एआईएडीएमके के पास 47 सीटें हैं। चुनाव के दौरान कांग्रेस डीएमके गठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन परिणाम आने के बाद उसने टीवीके को समर्थन दे दिया। इसके अलावा वाम दल, वीसीके, आईयूएमएल और हाल ही में वाइको की एमडीएमके ने भी डीएमके गठबंधन छोड़कर विजय सरकार का समर्थन करने का फैसला किया है।
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