लगभग तीन महीने से जारी तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। दोनों देशों ने 14 सूत्रीय शांति प्रस्ताव के मसौदे को अंतिम रूप दिया है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हस्ताक्षर होने की संभावना है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस समारोह में शामिल हो सकते हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
हालांकि दोनों देशों ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) का पूरा पाठ सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार यह 14 सूत्रीय मसौदा मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करने का रोडमैप है।
प्रस्ताव के प्रमुख बिंदुओं में सभी मोर्चों पर तत्काल और स्थायी युद्धविराम शामिल है, जिसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष भी शामिल हैं। अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने और उसके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आश्वासन दिया है।
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समझौते के अनुसार 30 दिनों के भीतर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह हटाई जाएगी और ईरान के आसपास तैनात अमेरिकी सैन्य बलों को वापस बुलाया जाएगा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को भी 30 दिनों के भीतर फिर से खोलने की योजना है।
दोनों पक्ष समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए पारस्परिक गारंटी देंगे। ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने तथा 60 दिनों की वार्ता अवधि के दौरान लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने का भी प्रस्ताव है।
इसके अलावा आर्थिक और बैंकिंग व्यवस्था को सामान्य बनाने के लिए विशेष तंत्र विकसित किया जाएगा। ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए 300 अरब डॉलर के कोष की स्थापना का प्रस्ताव भी शामिल है।
समझौते में भविष्य के सैन्य अभियानों को रोकने के लिए सुरक्षा गारंटी, विवादों के समाधान के लिए कूटनीतिक ढांचा तथा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन गतिविधियों पर 60 दिनों की अलग वार्ता प्रक्रिया का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए सत्यापन तंत्र भी स्थापित किया जाएगा।
डोनाल्ड ट्रंप और ईरान दोनों ने इस समझौते का स्वागत किया है, हालांकि तेहरान ने स्पष्ट किया है कि वह हस्ताक्षर होने के बाद ही इसे लागू करेगा।
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