दुनिया भर में आज हिरोशिमा दिवस मनाया गया। इस अवसर पर जापान के हिरोशिमा शहर पर हुए परमाणु बम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वर्ष 1945 में हुए इस हमले ने मानव इतिहास की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक को जन्म दिया था। बम विस्फोट के तुरंत बाद हजारों लोगों की मौत हो गई थी, जबकि वर्ष 1945 के अंत तक मृतकों की संख्या बढ़कर लगभग 1.40 लाख हो गई थी।
हिरोशिमा स्थित पीस मेमोरियल पार्क में आयोजित मुख्य स्मृति समारोह में पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। समारोह के दौरान सुबह निर्धारित समय पर दो मिनट का मौन रखकर उन सभी लोगों को याद किया गया, जिन्होंने इस विनाशकारी हमले में अपनी जान गंवाई थी। स्मारक पर 3,53,639 पीड़ितों के नामों वाला रजिस्टर भी श्रद्धांजलि स्वरूप रखा गया।
कार्यक्रम में शामिल नेताओं और शांति समर्थकों ने परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्व शांति और मानवता की सुरक्षा के लिए परमाणु हथियारों का अस्तित्व समाप्त होना आवश्यक है। इस अभियान की लंबे समय से पैरवी कर रहे परमाणु बम हमले के जीवित बचे लोगों, जिन्हें हिबाकुशा कहा जाता है, ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की।
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हिरोशिमा पर 6 अगस्त 1945 को हुए परमाणु हमले के केवल तीन दिन बाद जापान के नागासाकी शहर पर भी दूसरा परमाणु बम गिराया गया था। इन दोनों हमलों ने द्वितीय विश्व युद्ध के अंत का मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन साथ ही मानवता को परमाणु युद्ध की भयावहता का ऐसा अनुभव दिया, जिसे आज भी दुनिया नहीं भूली है।
हिरोशिमा दिवस केवल शोक और स्मरण का दिन नहीं है, बल्कि यह विश्व समुदाय को शांति, सह-अस्तित्व और परमाणु हथियारों से मुक्त भविष्य की दिशा में एकजुट होकर प्रयास करने की प्रेरणा भी देता है। यह अवसर आने वाली पीढ़ियों को युद्ध के दुष्परिणामों से सीख लेने और वैश्विक शांति बनाए रखने का संदेश देता है।
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