अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता 6 फरवरी को ओमान में फिर शुरू होने जा रही है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसकी पुष्टि की है। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में ईरान में हुए विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई और सैन्य घटनाओं के कारण दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है।
इससे पहले वार्ता के प्रारूप और स्थान को लेकर मतभेद पैदा हो गए थे। ईरान चाहता था कि बातचीत केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रहे और इसमें सिर्फ ईरान व अमेरिका के अधिकारी शामिल हों। शुरुआत में बैठक तुर्की में प्रस्तावित थी, लेकिन बाद में इसे ओमान स्थानांतरित कर दिया गया। व्हाइट हाउस ने भी इस बदलाव की पुष्टि की।
वार्ता से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि खामेनेई को “बहुत चिंतित” होना चाहिए। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन इन वार्ताओं की सफलता को लेकर अभी भी संशय में है, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों के दबाव के कारण बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी है।
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ईरान के सुधारवादी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने संकेत दिया है कि उन्होंने विदेश मंत्री को अमेरिका के साथ “निष्पक्ष और संतुलित” बातचीत करने का निर्देश दिया है, जिसे खामेनेई के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका चाहता है कि चर्चा केवल परमाणु मुद्दों तक सीमित न रहे, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय समूहों को समर्थन और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों। वहीं उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान के साथ कूटनीति चुनौतीपूर्ण है और उसे परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाल की सैन्य घटनाओं के बावजूद दोनों देश वार्ता के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
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