पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का पहला चरण समाप्त हो गया। इस ऐतिहासिक वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से वरिष्ठ वार्ताकार शामिल हुए।
यह वार्ता पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से की जा रही है, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। दोनों पक्षों के बीच अगला दौर रविवार को शुरू होने की संभावना है।
इस बीच, पोप लियो ने दुनिया के नेताओं से “युद्ध के पागलपन” को समाप्त करने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा, “अब समय आ गया है कि युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और शांति की मेज पर बैठा जाए।”
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वार्ता से पहले अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से अलग-अलग मुलाकात की। वहीं ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबाफ भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत अब तकनीकी मुद्दों तक पहुंच चुकी है। इस बीच अमेरिका ने दावा किया कि उसके युद्धपोत होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं और माइन हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। हालांकि, ईरान ने इस दावे को खारिज किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हो चुकी है और अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल हो सके।
दूसरी ओर, इजराइल ने दावा किया है कि उसने लेबनान में हिज़्बुल्लाह के 200 से अधिक ठिकानों पर हमला किया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
कुल मिलाकर, शांति वार्ता के बावजूद क्षेत्र में स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है और दुनिया की नजरें अगले दौर की बातचीत पर टिकी हैं।
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