स्विट्ज़रलैंड के डावोस में चल रही विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक 2026 के दूसरे दिन वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बुधवार (21 जनवरी 2026) को यूरोपीय नेताओं के साथ आमने-सामने होंगे। ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की उनकी कोशिशों ने ट्रांसअटलांटिक गठबंधन में तनाव पैदा कर दिया है और यह सप्ताह-भर चलने वाले इस सम्मेलन का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
डावोस में अमेरिका की G20 प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए अमेरिकी ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि “ग्रो बेबी, ग्रो” यानी तेज आर्थिक वृद्धि अमेरिका का मुख्य एजेंडा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका वैश्विक मंचों पर विकास, निवेश और बाजार-आधारित समाधानों को आगे बढ़ाना चाहता है।
इस बीच, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने मंगलवार (20 जनवरी 2026) को डावोस में एक विशेष संबोधन में घोषणा की कि यूरोपीय संघ भारत के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने के बेहद करीब है। उन्होंने इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए कहा कि यह समझौता करीब 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो वैश्विक GDP का लगभग एक-चौथाई होगा।
और पढ़ें: तकनीकी खराबी के बाद विमान बदलकर फिर दावोस रवाना हुए ट्रंप
भारत से जुड़ी एक और बड़ी घोषणा में, आंध्र प्रदेश सरकार ने WEF 2026 के दौरान आरएमजेड ग्रुप के साथ एक रणनीतिक निवेश साझेदारी का ऐलान किया। इस साझेदारी के तहत राज्य में बड़े पैमाने पर डिजिटल, मिक्स्ड-यूज़ और औद्योगिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जाएगा।
डावोस में बाजारों की प्रतिक्रिया पर टिप्पणी करते हुए बैंकिंग और मार्केट विशेषज्ञ अजय बग्गा ने कहा कि वैश्विक निवेशक ग्रीनलैंड मुद्दे पर किसी बातचीत से निकले समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। उनके अनुसार, बाजार मान रहे हैं कि डावोस के बाद अमेरिका और यूरोप के बीच कोई समझौता हो सकता है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर कोई बड़ा या दीर्घकालिक असर नहीं पड़ेगा।
और पढ़ें: ग्रेट दावोस डिवोर्स: ग्रीनलैंड मुद्दे पर ट्रंप के खिलाफ अमेरिका के सहयोगियों की लाल रेखा