कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने रविवार (4 जनवरी 2026) को ओडिशा के संबलपुर में पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मजदूरों से मुलाकात की और कुछ राज्यों में कथित “समानांतर पुलिसिंग” पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि निजी व्यक्ति प्रवासी मजदूरों से पहचान पत्र दिखाने की मांग कर रहे हैं, जो पूरी तरह से गलत है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
मुरशिदाबाद जिले की बहारमपुर लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रह चुके अधीर चौधरी ने प्रवासी मजदूरों को आश्वस्त किया कि कांग्रेस उनके साथ खड़ी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संज्ञान में भी लाया गया है।
अधीर चौधरी ने संबलपुर में पिछले महीने हुई 30 वर्षीय बंगाली भाषी प्रवासी मजदूर ज्वेल राणा की हत्या का भी जिक्र किया। आरोप है कि ‘बीड़ी’ को लेकर हुए विवाद के बाद हमलावरों ने ज्वेल राणा से आधार कार्ड दिखाने को कहा था, क्योंकि उन्हें उस पर बांग्लादेशी घुसपैठिया होने का शक था। हालांकि स्थानीय पुलिस ने इस आरोप से यह कहते हुए इनकार किया कि घटना के पीछे कोई ऐसी मंशा नहीं थी।
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कांग्रेस नेता ने कहा कि कुछ राज्यों में निजी लोग खुद को कानून से ऊपर समझकर प्रवासी मजदूरों से पूछताछ कर रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस से मांग की कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और किसी भी मजदूर को केवल संदेह के आधार पर परेशान न किया जाए।
अधीर चौधरी ने कहा कि वह इस मामले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के सामने भी उठाएंगे। उन्होंने दोहराया कि वह विभिन्न राज्यों में काम कर रहे बंगाली प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
अपने एकदिवसीय दौरे के दौरान अधीर चौधरी ने स्थानीय कांग्रेस नेताओं से भी मुलाकात की और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने उत्तरी रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल और संबलपुर के पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार भामू से भी भेंट की।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ज्वेल राणा हत्याकांड में आरोपियों को छह घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया गया और जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जाएगी। पुलिस ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है और लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की जा रही है।
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