कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भारत में शिक्षा, कार्यशैली और सेवाओं तक पहुंच के तरीकों को तेजी से बदल रही है। ऐसे में भारत यह सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है कि यह तकनीक नागरिकों के लिए समावेशी, जिम्मेदार और लाभकारी साबित हो। यह बात इंडिया एआई मिशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक सिंह ने कही।
यह संदेश 6 फरवरी को प्रसारित ‘डिजिटल इंडिया – आस्क आवर एक्सपर्ट्स’ कार्यक्रम के नवीनतम एपिसोड के दौरान सामने आया, जिसमें अभिषेक सिंह ने आगामी ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन केवल तकनीकी बहसों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इस पर केंद्रित होगा कि आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में एआई का उपयोग कैसे कर सकते हैं।
अभिषेक सिंह ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, शासन, स्टार्टअप्स, सेवाओं और रोजगार जैसे क्षेत्रों में एआई की व्यावहारिक उपयोगिता पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन एक जन-केंद्रित मंच के रूप में तैयार किया गया है, जिसका उद्देश्य वैश्विक एआई चर्चाओं को वास्तविक और उपयोगी परिणामों में बदलना है।
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उन्होंने कहा कि एआई किसानों को बेहतर फसल योजना और मौसम संबंधी जानकारी देने में मदद कर सकता है, डॉक्टरों को त्वरित और सटीक निदान में सहयोग कर सकता है, शिक्षकों को व्यक्तिगत शिक्षण उपकरण उपलब्ध करा सकता है और स्टार्टअप्स व छोटे व्यवसायों को तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम बना सकता है। इसके अलावा, यह नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को उभरते करियर अवसरों की दिशा भी दिखा सकता है।
रोजगार समाप्त होने और स्वचालन को लेकर उठ रही चिंताओं पर अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि एआई का उद्देश्य मनुष्यों को बदलना नहीं, बल्कि उनकी क्षमताओं को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि कुछ भूमिकाएं बदल सकती हैं, लेकिन एआई नए रोजगार, कौशल और अवसर भी पैदा करेगा, खासकर युवाओं, पेशेवरों, शोधकर्ताओं और उद्यमियों के लिए।
समापन में उन्होंने नागरिकों से भारत की एआई यात्रा में सक्रिय भागीदारी की अपील की और कहा कि एआई की सफलता सार्वजनिक विश्वास, समझ और जिम्मेदार उपयोग पर निर्भर करेगी। उनके अनुसार, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट तकनीक से आगे बढ़कर हर भारतीय के लिए बेहतर भविष्य गढ़ने का प्रयास है।
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