असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) महाराष्ट्र में हुए ताज़ा नगर निगम चुनावों में सबसे बड़े लाभ उठाने वाले दलों में शामिल होकर उभरी है। पार्टी ने न केवल अपने पार्षदों की संख्या लगभग दोगुनी कर ली है, बल्कि राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी भी तेज़ी से बढ़ाई है।
घोषित अंतिम परिणामों के अनुसार, AIMIM ने जिन 29 में से 12 नगर निगमों में चुनाव लड़ा, वहां करीब 114 पार्षद सीटें जीतने में सफलता हासिल की है। यह आंकड़ा पिछले नगर निकाय चुनावों में जीती गई लगभग 48 सीटों की तुलना में काफ़ी अधिक है। इस उल्लेखनीय बढ़त ने AIMIM को महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक प्रभावशाली ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM की यह सफलता खास तौर पर उन शहरी क्षेत्रों में देखने को मिली है, जहां अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अधिक है और स्थानीय मुद्दों को लेकर पार्टी ने आक्रामक प्रचार किया। पार्टी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी सुविधाओं और अल्पसंख्यक अधिकारों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जिसका असर मतदान परिणामों में साफ़ दिखाई दिया।
और पढ़ें: महाराष्ट्र निकाय चुनाव: अमिट स्याही हटाने के विवाद के बीच मतदान संपन्न, मतदान प्रतिशत करीब 50%
इन चुनावों में AIMIM ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) यानी NCP (SP) से भी अधिक सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। इससे राज्य की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है, खासकर आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के संदर्भ में।
AIMIM की बढ़ती ताकत यह संकेत देती है कि पार्टी अब केवल सीमित क्षेत्रों तक सिमटी नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभाने की ओर बढ़ रही है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सफलता पार्टी की व्यापक राजनीतिक रणनीति को किस तरह प्रभावित करती है।
और पढ़ें: महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव : मुंबई बीएमसी समेत 28 नगर निगमों में मतदान शुरू