महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के लिए मतदान गुरुवार (15 जनवरी 2026) की शाम संपन्न हो गया। राज्य निर्वाचन आयुक्त (SEC) दिनेश वाघमारे ने बताया कि कुल मतदान प्रतिशत 46 से 50 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है, जो वर्ष 2017 के नगर निकाय चुनावों की तुलना में अधिक है। एसईसी के आंकड़ों के अनुसार, दोपहर 3.30 बजे तक राज्यभर में 41.13 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। मतगणना शुक्रवार (16 जनवरी 2026) को होगी।
मतदान के दौरान उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब लोग मतदान के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही को हटाते हुए दिखाई दिए। आरोप लगाया गया कि “अमिट” स्याही की जगह साधारण मार्कर स्याही का इस्तेमाल किया गया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एसईसी दिनेश वाघमारे ने कहा कि जांच की जा रही है और गलत या भ्रामक नैरेटिव फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता की उंगली से स्याही हटाना एक दंडनीय अपराध है।
सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों पर केंद्रित रहा, जो देश का सबसे समृद्ध नगर निकाय माना जाता है। मुंबई में पारंपरिक ‘एक वार्ड–एक पार्षद’ व्यवस्था लागू है और यहां करीब दो दशक बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का साथ आना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। वहीं, मुंबई को छोड़कर अन्य शहरों में पहली बार पैनल सिस्टम के तहत एक वार्ड से कई पार्षद चुने जाएंगे, जिसके लिए मतदाताओं को एक से अधिक वोट डालने पड़े।
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इस बीच, चुनाव ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में छत्रपति संभाजीनगर, फुलंबरी और गंगापुर पंचायत समिति क्षेत्रों के 155 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इन कर्मचारियों ने न तो चुनाव सामग्री ली और न ही ड्यूटी पर पहुंचे।
उधर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को “अजीब रिश्तों का दौर” करार देते हुए कहा कि अब न दोस्त रहे हैं और न दुश्मन। उन्होंने कहा कि कहीं कांग्रेस और भाजपा साथ आए, तो कहीं भाजपा और एआईएमआईएम, जिससे राजनीति के नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।
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