समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार (24 जनवरी, 2026) को उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR) पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मतदाता सूची के इस पुनरीक्षण में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग पर निष्पक्षता बनाए रखने में विफल रहने का दावा किया।
अखिलेश यादव ने कहा कि यह एक बेहद महत्वपूर्ण मुद्दा है और इससे जुड़े कई तथ्य लगातार सामने आ रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब 4 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग ने एसआईआर की घोषणा की थी, तब यह आश्वासन दिया गया था कि मतदाता सूची में कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी और यह प्रक्रिया सूची को “शुद्ध और समावेशी” बनाएगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव आयोग ने मैपिंग और तकनीक के माध्यम से मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक बनाने तथा किसी भी मतदाता को वंचित न होने देने की बात कही थी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि कई स्थानों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
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कन्नौज सदर विधानसभा क्षेत्र, जो उनके लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है, का उदाहरण देते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि यदि एक ही विधानसभा क्षेत्र में ऐसी स्थिति है, तो पूरे प्रदेश की स्थिति की कल्पना की जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और संवैधानिक संस्था होने के बावजूद चुनाव आयोग निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहा है।
अखिलेश यादव ने हालिया उपचुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि बूथों पर “वोट लूटे गए”। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने के बावजूद चुनाव आयोग ने उसे किसी भी राजनीतिक दल को देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है और भाजपा सरकार इसके जरिए साजिश और हेरफेर की तैयारी कर रही है। साथ ही, उन्होंने एसआईआर की समयसीमा में बार-बार विस्तार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आयोग की तैयारियों की कमी उजागर होती है।
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