केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में अवैध घुसपैठ को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि केंद्र सरकार भारत–बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। गुजरात के गांधीनगर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को लगभग 600 हेक्टेयर जमीन सौंप दी गई है, जिससे सीमा पर सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जा सके।
उन्होंने यह भी बताया कि रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील “चिकन नेक” कॉरिडोर क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां लगभग 121 हेक्टेयर भूमि बीएसएफ को दी गई है। इस कदम का उद्देश्य निगरानी बढ़ाना और राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करना है।
अमित शाह ने दावा किया कि इस कार्रवाई के बाद अवैध घुसपैठियों में डर का माहौल बना है और कई लोग सख्त निगरानी के चलते स्वेच्छा से वापस लौट रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।
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गृह मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य में डिटेंशन सेंटर बनाए जा रहे हैं ताकि अवैध प्रवासियों से जुड़े मामलों को प्रभावी ढंग से संभाला जा सके। इसके साथ ही भारत–बांग्लादेश सीमा पर वर्षों से रुके हुए फेंसिंग कार्य को फिर से शुरू करने की योजना है, ताकि घुसपैठ के सभी संभावित रास्तों को बंद किया जा सके।
अमित शाह ने दोहराया कि सरकार का रुख स्पष्ट है—हर अवैध घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से वापस भेजा जाएगा।
इस बीच पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर सख्त कार्रवाई की बात कही। उन्होंने कहा कि हर जिले में होल्डिंग सेंटर बनाए जाने चाहिए और पुलिस को निर्देश दिया गया है कि ऐसे लोगों को सामान्य जेलों में न रखा जाए।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा जाना चाहिए क्योंकि वे उसी देश के नागरिक हैं। अधिकारी ने यह भी कहा कि यह नया कानून नहीं है बल्कि विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) पहले से लागू है और इसका सही ढंग से पालन होना चाहिए।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच सीमा सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर सख्ती के संकेत साफ नजर आ रहे हैं।
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