केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को देश में नशीले पदार्थों के खिलाफ 31 मार्च से तीन साल का राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य देश से नशे की समस्या को जड़ से खत्म करना और युवाओं को नशे की लत से बचाना है।
गृह मंत्री ने यह घोषणा नार्को-कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCORD) की 9वीं शीर्ष स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि इस सामूहिक अभियान के तहत नशा विरोधी प्रयासों के सभी स्तंभों के लिए एक स्पष्ट कार्यप्रणाली तय की जाएगी, लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे और समयबद्ध समीक्षा की जाएगी।
अमित शाह ने बताया कि नशे के खिलाफ यह अभियान 31 मार्च को नक्सलवाद खत्म करने की तय समय-सीमा के तुरंत बाद शुरू किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने अमृतसर में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नए कार्यालय का वर्चुअल उद्घाटन भी किया।
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उन्होंने सभी केंद्रीय विभागों और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वे 31 मार्च तक नशा नियंत्रण के लिए रोडमैप तैयार करें, निगरानी तंत्र स्थापित करें और इस समस्या के समाधान पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें। शाह ने कहा, “अगले तीन वर्षों में हमें देशभर में नशे के खिलाफ हर मोर्चे पर लड़ाई लड़नी है और भारत को ‘नशा मुक्त’ बनाना है।”
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों के निर्माता और तस्करों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जाएगी, जबकि नशे के शिकार लोगों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। उन्होंने इसे केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि ‘नार्को-आतंकवाद’ से जुड़ी गंभीर साजिश बताया, जो आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद करने का प्रयास है।
अमित शाह ने कहा कि 2014 से 2025 के बीच 1.11 लाख किलोग्राम ड्रग्स, जिसकी कीमत ₹1.71 लाख करोड़ है, जब्त की गई, जो 2004-2013 की तुलना में 11 गुना अधिक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कमांड, अनुपालन और जवाबदेही को मजबूत कर नशा मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
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