भारतीय भौतिक विज्ञानी अशोक सेन ने विज्ञान के क्षेत्र में देश का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ऑस्कर क्लाइन मेडल से सम्मानित किया गया है। इस सम्मान को पाने वाले वह पहले भारतीय भौतिक विज्ञानी बन गए हैं। इससे पहले यह पदक स्टीफन हॉकिंग, पीटर हिग्स और किप थॉर्न जैसे प्रसिद्ध वैज्ञानिकों को मिल चुका है।
अशोक सेन बेंगलुरु स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल साइंसेज (आईसीटीएस) और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (टीआईएफआर) से जुड़े हैं। वह आईसीटीएस-इन्फोसिस माधव चेयर प्रोफेसर हैं। उन्हें आधुनिक स्ट्रिंग थ्योरी के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले वैज्ञानिकों में गिना जाता है।
क्या है स्ट्रिंग थ्योरी?
स्ट्रिंग थ्योरी भौतिकी का एक सिद्धांत है, जिसके अनुसार पदार्थ के मूल घटक बिंदु जैसे कणों के बजाय बेहद छोटे, एक-आयामी तार जैसी संरचनाएं हो सकते हैं। यह सिद्धांत पदार्थ और उसके बीच काम करने वाली मूलभूत शक्तियों को एक व्यापक ढांचे में समझाने का प्रयास करता है।
और पढ़ें: फ्रांसिस हॉल्जेन को भौतिकी का नोबेल पुरस्कार, ब्रह्मांडीय स्रोतों से उच्च-ऊर्जा न्यूट्रिनो की खोज के लिए सम्मान
वर्ष 1988 में शुरू किया गया ऑस्कर क्लाइन मेडल स्वीडिश सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी ऑस्कर क्लाइन के नाम पर रखा गया है। यह सम्मान स्टॉकहोम विश्वविद्यालय और रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज की नोबेल भौतिकी समिति की ओर से संयुक्त रूप से दिया जाता है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय ने भी अशोक सेन को बधाई दी। कार्यालय के अनुसार, स्ट्रिंग थ्योरी में उनके अग्रणी शोध, खासकर एस-ड्यूलिटी, ब्लैक होल की एंट्रॉपी की सटीक गणना और स्ट्रिंग फील्ड थ्योरी से जुड़े कार्यों ने आधुनिक भौतिकी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कौन हैं अशोक सेन?
अशोक सेन का जन्म 15 जुलाई 1956 को हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक, आईआईटी कानपुर से परास्नातक और अमेरिका की स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। वर्ष 1995 में वह हरिश्चंद्र रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े और लगभग 26 वर्षों तक वहां कार्य किया। इसके बाद वह बेंगलुरु स्थित आईसीटीएस पहुंचे।
भौतिकी में योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में पद्मश्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। उन्हें 2012 में फंडामेंटल फिजिक्स का ब्रेकथ्रू पुरस्कार भी मिला। वर्ष 1998 में वह रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने गए, जबकि 1995 में इंडियन नेशनल साइंस अकादमी के फेलो बने।
और पढ़ें: हरमनप्रीत कौर ने रचा इतिहास, शतक लगाकर मिताली राज को पछाड़ा; स्मृति मंधाना से पीछे