असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और जोरहाट से सांसद गौरव गोगोई ने शनिवार (31 जनवरी, 2026) को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर कड़ा हमला करते हुए आरोप लगाया कि वह अपने ‘एंटी-मियां’ नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का नाम घसीट रहे हैं। गोगोई ने कहा कि जैसे ही उन्होंने अदालत की अवमानना का मुद्दा उठाया, मुख्यमंत्री इस विषय पर चुप हो गए।
गौरव गोगोई ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर एक विशेष समुदाय के खिलाफ बयान देना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा के भी खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मुद्दों को जानबूझकर उछाल रहे हैं और समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह चेतावनी दी कि इस तरह के बयान न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आ सकते हैं, तो मुख्यमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। गोगोई के मुताबिक, इससे यह साफ होता है कि मुख्यमंत्री को भी अपने बयानों की कानूनी सीमाओं का अहसास है।
और पढ़ें: कर्नाटक के होसकोटे में असम के चार प्रवासी मजदूर मृत मिले, दम घुटने से मौत की आशंका
गोगोई ने कहा कि असम में विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था जैसे अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ‘मियां’ जैसे शब्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री समाज के एक वर्ग को निशाना बनाकर ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं।
कांग्रेस सांसद ने मांग की कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा बनाए रखनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट जैसी सर्वोच्च संवैधानिक संस्था को राजनीतिक विवादों में घसीटने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस तरह की राजनीति का विरोध करती रहेगी और संविधान व कानून के दायरे में रहकर जवाब देगी।
और पढ़ें: सीजे रॉय के पोस्टमार्टम से खुलासा: 6.35 मिमी की गोली से दिल-फेफड़ों में लगी चोट, तत्काल हुई मौत