विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि गाजा पट्टी में जारी हिंसा को समाप्त करना आज पूरी दुनिया की साझा प्राथमिकता बन चुका है। शनिवार (31 जनवरी, 2026) को दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में उद्घाटन भाषण देते हुए उन्होंने गाजा सहित पश्चिम एशिया और अरब क्षेत्र में जारी कई संघर्षों पर चिंता जताई।
बैठक को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि लीबिया, सूडान और गाजा तक फैले संघर्ष न केवल संबंधित देशों को प्रभावित कर रहे हैं, बल्कि भारत सहित पूरे क्षेत्र पर इसका असर पड़ता है। उन्होंने ‘स्थिरता, शांति और समृद्धि की ताकतों’ को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस महीने के अंत में प्रस्तावित इज़राइल यात्रा से पहले आयोजित की गई।
जयशंकर ने कहा, “गाजा संघर्ष को समाप्त करने के लिए व्यापक योजना को आगे बढ़ाना आज व्यापक रूप से साझा प्राथमिकता है। कई देशों ने व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से शांति योजनाओं पर नीतिगत घोषणाएं की हैं। यही वह बड़ा संदर्भ है, जिसमें हम क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।”
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उन्होंने अक्टूबर 2025 में आयोजित शर्म-अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां गाजा में शांति स्थापना के प्रयास किए गए थे। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 2803 पारित हुआ, जिसमें ‘संक्रमणकालीन प्रशासन’ की अवधारणा का समर्थन किया गया और अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल (आईएसएफ) की स्थापना को मंजूरी दी गई।
जयशंकर ने कहा कि गाजा में जारी संघर्ष में अब तक 72,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है, जो पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए गंभीर चिंता का विषय है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह गाजा, सूडान, लीबिया और लेबनान जैसे क्षेत्रों में हिंसा समाप्त करने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के हर प्रयास का समर्थन करता रहेगा।
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