समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को शनिवार को रामपुर जिला जेल से रिहा होने के कुछ ही देर बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत में ले लिया। जेल से बाहर निकलने के बाद दोनों को वाहन में बैठाया जा रहा था, तभी ईडी अधिकारियों और आजम खान के बीच तीखी बहस हो गई। इस दौरान मौके पर धक्का-मुक्की भी हुई।
घटना के बाद जेल के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी भीड़ जमा हो गई। हंगामे को देखते हुए पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गया। आसपास के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया।
आजम खान बोले- मुस्लिम होने की यही सजा है?
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान ने अपने और बेटे के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम पहचान और विश्वविद्यालय बनाने की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
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आजम खान ने कहा, "अब कहने के लिए क्या बचा है? कानून का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। क्या मुस्लिम होने की यही सजा है? हमारा अपराध सिर्फ इतना है कि एक मुस्लिम ने विश्वविद्यालय बनाया। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए, क्या यही हमारा अपराध है?"
दो पैन कार्ड मामले में मिली थी रिहाई
आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में सात साल की सजा सुनाई गई थी। गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोनों की सजा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद रामपुर की संबंधित सांसद-विधायक अदालत ने रिहाई के आदेश जारी किए।
उनके वकील मोहम्मद जुबैर खान ने शनिवार को आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जेल प्रशासन को रिहाई के आदेश सौंपे थे।
हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर नहीं लगाई रोक
न्यायमूर्ति समित गोपाल की पीठ ने पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों की सात साल की सजा निलंबित कर दी, लेकिन उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, एनआई जाफरी और अधिवक्ता शाश्वत आनंद ने आजम खान और अब्दुल्ला की ओर से दलीलें पेश की थीं।
2019 में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला वर्ष 2019 का है। बीजेपी नेता आकाश सक्सेना की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड का इस्तेमाल कर अनुचित लाभ हासिल करने की कोशिश की।
पिछले साल नवंबर में रामपुर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को धोखाधड़ी, जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश का दोषी ठहराया था।
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