उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में पुलिस ने लगभग ₹24 करोड़ के अवैध वित्तीय लेन-देन से जुड़े एक संदिग्ध हवाला और जीएसटी धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर फर्जी कंपनियों और तथाकथित “म्यूल अकाउंट्स” के जरिए धन के अवैध लेन-देन का आरोप है। पुलिस ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को यह जानकारी दी।
बरेली के पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशिका वर्मा ने बताया कि यह रैकेट तब सामने आया जब एक छोटे जरी (कढ़ाई) कारीगर को आयकर विभाग से करीब ₹1.5 करोड़ का नोटिस मिला। यह नोटिस ऐसे लेन-देन से जुड़ा था, जिनकी जानकारी उस कारीगर को बिल्कुल नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों को निशाना बनाया। उन्हें व्यापार बढ़ाने या निर्यात के बाजार में प्रवेश दिलाने का झांसा देकर उनसे आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे पहचान पत्र हासिल किए गए। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए गए और फर्जी या शेल कंपनियां बनाई गईं, जिनका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर अनधिकृत वित्तीय लेन-देन के लिए किया गया।
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एसपी अंशिका वर्मा ने बताया कि जांच में सामने आया कि ‘सत्य साहब ट्रेडर्स’ नामक एक फर्जी फर्म जरी कारीगर के नाम पर बनाई गई थी। इस फर्म के जरिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खाते खोले गए और महज एक साल में लगभग ₹24 करोड़ के संदिग्ध लेन-देन किए गए।
पुलिस ने यह भी पाया कि महावीर ट्रेडिंग कंपनी, महाकाल ट्रेडर्स और सुमित ट्रेडर्स जैसी कई अन्य कंपनियां सिर्फ कागजों पर मौजूद थीं। इनका इस्तेमाल फर्जी बिल और इनवॉइस बनाकर जीएसटी चोरी के लिए किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह जीएसटी फ्रॉड का मामला लगता है, लेकिन धन के आवागमन के तरीके से हवाला नेटवर्क की संलिप्तता की भी आशंका है।
इस मामले में शाहिद अहमद (38) और अमित गुप्ता (38) को बरेली के भुता इलाके से गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से कई मोबाइल फोन और नकदी बरामद की गई है। भारतीय न्याय संहिता और अन्य संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है।
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