केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ गुरुवार (12 फरवरी 2026) को देशभर में ट्रेड यूनियनों द्वारा किए जा रहे भारत बंद को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि देश के मजदूर, किसान और कर्मचारी सरकार की ट्रेड डील, श्रम कानूनों और मनरेगा को कमजोर करने के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने मजदूरों और किसानों के भविष्य से जुड़े फैसले लेते समय उनकी आवाज को नजरअंदाज किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब उनकी बात सुनेंगे या उन पर भी किसी का “कड़ा नियंत्रण” है।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच से जुड़े कर्मचारी और मजदूर एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं। इस हड़ताल का उद्देश्य सरकार की कथित “मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थक” नीतियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराना है। यूनियनों का दावा है कि इस आम हड़ताल में करीब 30 करोड़ मजदूरों को शामिल करने की कोशिश की जा रही है।
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देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। चेन्नई में ट्रेड यूनियनों के सदस्यों ने चार नए श्रम संहिताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि ये श्रम कानून मजदूरों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं और केवल कॉर्पोरेट हितों को बढ़ावा देते हैं।
इस देशव्यापी बंद का आह्वान दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के समूह ने किया था, जिनमें INTUC, AITUC, CITU, AIUTUC और LPF शामिल हैं। यूनियनों ने पहले ही श्रम सुधारों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की थी।
कांग्रेस ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि यह जनता के अधिकारों और आजीविका की रक्षा की लड़ाई है। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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