लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में परिसर के भीतर मौजूद कथित अवैध मजारों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन धार्मिक संरचनाओं को हटाने के लिए संबंधित समितियों को दो नोटिस जारी किए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद 6–7 मजारों पर नोटिस चस्पा कर उन्हें 15 दिनों के भीतर स्वेच्छा से हटाने का अल्टीमेटम दिया गया है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तय समय सीमा में इन्हें नहीं हटाया गया, तो प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा और खर्च संबंधित मजार समितियों से वसूला जाएगा।
केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि यह जमीन केवल शैक्षणिक और चिकित्सा गतिविधियों के लिए निर्धारित है और इन संरचनाओं के पास वैध भूमि रिकॉर्ड या निर्माण की आधिकारिक अनुमति नहीं है। इसलिए इन्हें विश्वविद्यालय की संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण माना गया है।
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इस मुद्दे पर कई भाजपा नेताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इन “अवैध संरचनाओं” को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि ये निर्माण सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हैं और संस्थान की सुरक्षा व धर्मनिरपेक्ष छवि पर असर डाल सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ मजारें दशकों से यहां मौजूद हैं और श्रद्धालु लंबे समय से यहां आते रहे हैं। इसी कारण यह कदम विवाद का कारण बन गया है।
AIMIM ने विश्वविद्यालय के नोटिस का कड़ा विरोध किया है। पार्टी के यूपी अध्यक्ष शेख ताहिर सिद्दीकी ने इसे “गैरकानूनी और भ्रामक” बताते हुए राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि अतिक्रमण का मामला है तो इसे सरकार के सामने रखा जाना चाहिए, न कि विश्वविद्यालय द्वारा एकतरफा कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मजारों को हटाने की कोशिश की गई तो AIMIM पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन करेगी।
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