मुंबई में प्रस्तावित बिहार भवन के निर्माण को लेकर बिहार सरकार और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। MNS नेता यशवंत किलेदार द्वारा बिहार भवन के निर्माण को रोकने की धमकी दिए जाने पर बिहार सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “यह कोई राजशाही नहीं है और मुंबई व महाराष्ट्र पूरे देश के हैं।”
हाल ही में बिहार मंत्रिमंडल ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट के पास 0.68 एकड़ भूमि पर बनने वाले 30 मंजिला बिहार भवन परियोजना के लिए 314.2 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस भवन का उद्देश्य मुंबई में रहने और काम करने वाले बिहार के प्रवासी लोगों को आवास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
MNS नेता यशवंत किलेदार ने दावा किया था कि उनकी पार्टी मुंबई में बिहार भवन के निर्माण की अनुमति नहीं देगी। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा, “यह कैसी भाषा है? कोई MNS नेता इस तरह कैसे बोल सकता है?” उन्होंने आगे कहा, “हम MNS को चुनौती देते हैं कि वह बिहार भवन का निर्माण रोककर दिखाए। हम जल्द ही इसका निर्माण शुरू करेंगे।”
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इस पूरे विवाद के बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नीतीश कुमार सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े किए हैं। RJD नेताओं का कहना है कि बिहार सरकार को पहले राज्य के भीतर बुनियादी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, बजाय इसके कि वह दूसरे राज्यों में महंगी इमारतों के निर्माण पर भारी रकम खर्च करे।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें प्रवासी मजदूरों, राज्यों के बीच संबंधों और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े बड़े सवाल भी शामिल हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार और महाराष्ट्र दोनों की राजनीति में और तूल पकड़ सकता है।
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