बिहार मंत्रिमंडल के सदस्यों द्वारा वर्ष 2025 के अंतिम दिन सार्वजनिक की गई संपत्ति की घोषणा के अनुसार, राज्य के अधिकांश कैबिनेट मंत्री मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अधिक संपन्न हैं। आंकड़ों से यह सामने आया है कि खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुल संपत्ति उनके कई मंत्रियों, विशेषकर दोनों उपमुख्यमंत्रियों की तुलना में काफी कम है।
घोषणा के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुल संपत्ति ₹1.66 करोड़ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल ₹68,455 की बढ़ोतरी दर्शाती है। उनके पास नकद राशि बेहद सीमित है। विवरण के अनुसार, उनके पास हाथ में मात्र ₹20,552 नकद हैं और बैंक खातों में कुल जमा राशि ₹57,000 है। इसमें पटना सचिवालय स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में ₹27,217, दिल्ली के संसद भवन स्थित SBI शाखा में ₹3,358 और पटना के बोरिंग रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में ₹27,191 जमा हैं।
इसके विपरीत, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा (वी.के. सिन्हा) मुख्यमंत्री से कहीं अधिक संपन्न हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषित संपत्ति ₹6.38 करोड़ है, जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की कुल संपत्ति ₹8.81 करोड़ बताई गई है।
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संपत्ति के ये आंकड़े बिहार की राजनीति में एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं, जहां सत्ता के शीर्ष पद पर आसीन मुख्यमंत्री अपेक्षाकृत कम संपन्न हैं, जबकि उनके सहयोगी मंत्री और उपमुख्यमंत्री उनसे कई गुना अधिक संपत्ति के मालिक हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है, ताकि जनता को अपने जनप्रतिनिधियों की आर्थिक स्थिति की जानकारी मिल सके। बिहार मंत्रिमंडल की यह घोषणा एक बार फिर राजनीतिक नेतृत्व और व्यक्तिगत संपत्ति के बीच के अंतर को उजागर करती है।
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