2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात में संगठन को मजबूत करने के लिए नए प्रदेश प्रभारियों की नियुक्ति की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने मंगलवार को इन नियुक्तियों की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश में विनोद तावड़े को भाजपा का प्रदेश प्रभारी बनाया गया है, जबकि जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पंजाब में सतीश पूनिया को पार्टी का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। वहीं, तरुण चुघ को गुजरात का प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का कहना है कि इन नियुक्तियों का उद्देश्य तीनों राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत करना और बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
2027 में कई राज्यों में चुनाव
वर्ष 2027 राज्य स्तरीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात के अलावा उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और हिमाचल प्रदेश में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।
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उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा सीटें हैं, जबकि पंजाब में 117 और गुजरात में 182 सीटें हैं। उत्तराखंड में 70, गोवा में 40, मणिपुर में 60 और हिमाचल प्रदेश में 68 विधानसभा सीटें हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार इन राज्यों में अलग-अलग समय पर मतदान कराया जाएगा।
भाजपा की राष्ट्रीय टीम में भी बड़ा बदलाव
भाजपा ने राष्ट्रीय संगठन में भी व्यापक फेरबदल किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है, जबकि आरएसएस के पूर्व पदाधिकारी राम माधव को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
पूर्व राजस्थान मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को भी 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्षों में शामिल किया गया है। पार्टी की नई विस्तृत टीम में कुल 65 पदाधिकारी हैं, जिनमें 51 नए चेहरे शामिल हैं। इनमें 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों से छह नेता हैं।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा ने बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बरकरार रखा है।
संगठनात्मक बदलाव के तहत भाजपा के आईटी विभाग में भी परिवर्तन हुआ है। छत्तीसगढ़ के दीपक म्हस्के को अमित मालवीय की जगह आईटी विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। गुजरात के हेमंग जोशी को भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या का स्थान लिया है।
भाजपा का यह फेरबदल 2015 के बाद सबसे बड़े संगठनात्मक बदलावों में से एक है। इसके बाद केंद्र में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं।
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